Yuva pidhi par nibandh | युवा पीढ़ी पर निबंध

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आज के इस लेख और आर्टिकल में हम जानेंगे और पढ़ेंगे युवा पीढ़ी पर निबंध (Yuva pidhi par nibandh) तो क्या आप तैयार है? युवा पीढ़ी पर निबंध जो नीचे दिया गया है इसका उपयोग आप निबंध के अलावा ग्रुप डिस्कशन, भाषण प्रतियोगिता या वाद-विवाद प्रतियोगिता के लिए भी उपयोग कर सकते हैं।

युवा पीढ़ी पर निबंध | Yuva pidhi par nibandh

Yuva pidhi par nibandh | युवा पीढ़ी पर निबंध
Yuva pidhi par nibandh | युवा पीढ़ी पर निबंध

किसी भी देश की असली ताकत उसके युवाओं में समाहित है। युवा पीढ़ी में ही वह शक्ति निहित है, जो किसी भी तरह का परिवर्तन कर पाने में सक्षम होती है। इसलिए जब किसी भी मोड़ पर मानव सभ्यता को अपने अस्तित्व के लिए एक नई दिशा की जरूरत पड़ी, तो उसने अपनी युवा पीढ़ी की ओर निहारा और युवा पीढ़ी ने भी अपने दायित्व को समझते हुए परिवर्तन का, बदलाव का बीड़ा अपने कंधों पर उठाया।

युवाओं में दो तरह के खास गुण होते हैं। पहला तो उनमें इतनी स्फूर्ति व ऊर्जा होती है कि वे कुछ नया करके दिखा सकें और दूसरा यह कि उन्हें अपने जीवन में इतनी ठोकरें नहीं मिली होती हैं कि वे अपने जीवन से निराश हो जाएँ और प्रयास करना ही छोड़ दें। तात्पर्य यह है कि युवा पीढ़ी के अंदर कुछ कर गुजरने की ताकत होती है, यह ताकत ही उनसे कुछ नया करवा लेती है और उनके कार्यों से दुनिया इतनी चमत्कृत होती है कि उनकी प्रतिभा व उनके कार्यों के समक्ष वह अपना मस्तक झुका देती है अर्थात उनका खुले दिल से स्वागत करती है।

युवा पीढ़ी के अंदर वह शक्ति होती है, जिसके कारण वह अन्याय को स्वीकार नहीं कर पाती; बल्कि उसके प्रति विद्रोह कर देती है और यही कारण है कि विश्व में जब कभी किसी क्रांति या बदलाव की जरूरत आन पड़ी, तो नौजवानों ने ही आगे बढ़कर मोर्चा संभाला है। इतिहास की ओर यदि दृष्टि डाली जाए तो ऐसे अनगिनत उदाहरण देखने को मिलेंगे, जो यह बताते हैं कि युवा पीढ़ी में से ही किसी एक ने समाज में होने वाले बदलावों में अपनी मुख्य भूमिका निभाई है।

आज दुनिया का कोई भी देश यदि बीते काल को पीछे छोड़कर एक नई ऊर्जा के साथ अपना वर्तमान जी रहा है, तो इसका श्रेय युवा पीढ़ी को ही जाता है। उसकी स्फूर्ति और उसके कार्य करने की सदिच्छा को यदि सही मौका मिल सके तो युवा पीढ़ी कुछ ऐसा अच्छा कर सकती है, जो अविस्मरणीय व प्रशंसनीय होता है; लेकिन जब-जब इसे गलत दिशा दी जाती है, तो यह देश व समाज के लिए विनाशकारी साबित होती है।

आज भारत युवा शक्ति के मामले में दुनिया में सबसे आगे है। बस, केवल हमें युवा शक्ति को सही राह दिखाने की जरूरत है। भारतीय युवा पीढ़ी सकारात्मक होने के साथ-साथ मेहनती है, लेकिन देश में अनेक ऐसे उपद्रवी तत्त्व भी मौजूद हैं, जो इस युवा पीढ़ी की शक्ति को गलत दिशा में लगाना चाहते हैं और कई बार इसमें सफल भी हो जाते हैं। जैसे हमारे देश में जो नक्सलवाद, आतंकवाद पनप रहा है, उसमें भी युवा पीढ़ी ही कार्यरत है, जो अपनी दिशा से भटक चुकी है।

किसी भी व्यक्ति को भटकाना तभी संभव है, जब मानसिक स्तर पर उसे इतनी गहराई से प्रभावित किया जाए, इस तरह से समझाया जाए कि फिर वह कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाए। नक्सलवाद व आतंकवाद को प्रश्रय देने वाले संगठन भी अपने लोगों के दिलोदिमाग में ऐसी बातें गहराई से बैठा देते हैं कि उन्हें यही कार्य करना सबसे सही लगता है और इसे करने के लिए वे अपने प्राणों की बलि देने से भी नहीं चूकते हैं।

नक्सलवाद व आतंकवाद को बढ़ाने में शामिल होने वाले लोग यदि सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ चलें तो निश्चित रूप से वे कुछ उल्लेखनीय कर जाएँगे, लेकिन इन लोगों के मन में मानव जाति के प्रति विद्रोह का बीजारोपण इतनी गहराई से किया जाता है; नकारात्मकता की विषबेल इनके मनों में इस कदर फैलाई जाती है कि वे दूसरों का अंत करने में तनिक भी संकोच नहीं करते, बल्कि ऐसा करके वे और अधिक प्रसन्न होते हैं।

आतंकवाद फैलाने वाले लोग विध्वंसक प्रकृति के होते हैं, वे सृजन की बात कभी भी नहीं सोच सकते। विध्वंस करना आसान होता है, लेकिन सृजन करना उतना ही कठिन होता है और इस सृजन का दायित्व वे ही युवा उठा पाते हैं, जिनकी प्रतिभा सकारात्मक होती है। युवा पीढ़ी के लिए सकारात्मकता उस अमृत के समान है, जो उन्हें उनके कार्यों के द्वारा अमर कर देती है और नकारात्मकता उस विष के समान है, जो समाज में उनके अपयश को फैलाती है और धीरे-धीरे उनका भी अंत कर देती है।

हालाँकि युवा पीढ़ी की एक कमजोरी-उनमें मौजूद उतावलापन है। इसके लिए उन्हें यह समझने की जरूरत है कि किसी बड़े काम को करने के लिए समय भी उतना ही लगता है। जिस तरह यदि किसी मकान की हर मंजिल पर धैर्यपूर्वक काम नहीं किया गया, तो वह इमारत टिकाऊ नहीं बनेगी; ठीक उसी तरह जल्दबाजी से कोई भी कार्य ठीक तरह से पूर्ण नहीं होता, ऐसे कार्य में कुशलता प्रदर्शित नहीं होती।

हमारी युवा पीढ़ी एक तथ्य को सदैव विस्मृत कर देती है कि हमसे पहले वाली पीढ़ी के लोगों ने भी कुछ करने की कोशिश की होगी। युवा पीढ़ी का यह दायित्व है कि वे अपने बड़े-बुजुर्गों के प्रयासों को बेकार समझने की भूल न करें और उनसे हर संभव कुछ सीखने का प्रयास करें। कुछ नया वे तभी कर पाएँगे, जब वे अपनी पुरानी गलतियों या सफलताओं को देखकर नई जगहों पर कदम रखेंगे। इसलिए बड़े-बुजुर्गों की उपलब्धियों को नकारकर अपनी ऊर्जा फिर से उसी काम में उसी तरह से खरच करना उचित नहीं।

लोगों के अनुभव मूल्यवान होते हैं, इसलिए उनसे सीखना चाहिए, उनसे सबक लेना चाहिए। नए विचारों का सृजन तभी किया जा सकता है, जब पुराने अनुभव से सीखा जाए और उसका गहन विश्लेषण किया जाए। सीखने की मानसिकता रहने पर ही युवा कुछ नया कर सकते हैं। इसलिए उन्हें अतिआत्मविश्वास से बचना चाहिए और पुरानी उपलब्धियों को खुले दिल से कबूलना और आत्मसात् करना चाहिए।

यदि ऐसा संभव हो सका, तो निश्चित ही हमारी नई पीढ़ी कुछ नया कर सकती है व कई नई उपलब्धियाँ – अपने खाते में जोड़ सकती है। युवाओं के पास जो ऊर्जा है, जो सकारात्मक व सृजनात्मक सोच है, जो प्रबल इच्छाशक्ति है, उसके माध्यम से वे अपने देश को एक नई ऊँचाई पर ले जा सकते हैं। आज उसी दिशा में एक प्रयास करने की जरूरत है।

निष्कर्ष: युवा पीढ़ी पर निबंध से सम्बंधित सुझाब


तो यह रहा युवा पीढ़ी पर निबंध (Yuva pidhi par nibandh) इस निबंध में युवा पीढ़ी से संबंधित सारी जानकारी आपको प्राप्त हुई जो आप अपने निबंध को लिखते समय प्रयोग कर सकते हैं। बस हमारा सुझाव और राय यह है कि आप इस निबंध को पहले पूरे अच्छे तरीके से पढ़ें उसके बाद खुद से लिखने का प्रयास करें। जब भी आप किसी प्रकार के निबंध को लिख रहे होते हैं तो उसके बारे में पहले इंफॉर्मेशन इकट्ठा कर ले और उसे खुद से ही लिखने का प्रयास करें इससे आपके अंदर निबंध लिखने का आदत विकसित होता है।

अगर आपको यह युवा पीढ़ी पर निबंध (Yuva pidhi par nibandh) पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों के बीच अवश्य शेयर करें।

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